घानी मुंदी कस गिंजरत हावंव,
मोर जिनगी के नइये ठिकाना।
मोर जिनगी के नइये ठिकाना।
काकर संग गोठियावंव दीदी,
अंधियारी बगरे हे चारो मुड़ा ।
पुक कस रोज उंडत रहिथंव,
मोला बखाना के मिलथे गुड़ा ।।
कोन जनम म काय कर डारेंव,
गोसइया देवत रथे मोला ताना...
अंधियारी बगरे हे चारो मुड़ा ।
पुक कस रोज उंडत रहिथंव,
मोला बखाना के मिलथे गुड़ा ।।
कोन जनम म काय कर डारेंव,
गोसइया देवत रथे मोला ताना...
सुरूज चंदा मोर हावय गवाही,
हीरा सरिक शुद्ध हावय मोर तनमन ।
घर के मनउती ल कले चुप राखेंव,
बन्दवा चोखही कहिथे सब झन।।
कोलिहा कुकुर कस जियत हावंव,
मोर घर ले होवत हावय निकारा ...
हीरा सरिक शुद्ध हावय मोर तनमन ।
घर के मनउती ल कले चुप राखेंव,
बन्दवा चोखही कहिथे सब झन।।
कोलिहा कुकुर कस जियत हावंव,
मोर घर ले होवत हावय निकारा ...
चुरेना म चुरत जियत हावंव,
चारो कोती ले मिलथे गारी ।
काकर पाला परगेंव मय हर,
भगवान काबर बनाइस नारी ।।
बेटी मान के करतीन मया त,
घर के बाढ़न बर बनतें गारी...
चारो कोती ले मिलथे गारी ।
काकर पाला परगेंव मय हर,
भगवान काबर बनाइस नारी ।।
बेटी मान के करतीन मया त,
घर के बाढ़न बर बनतें गारी...
बहू बेटी ल झन दे गारी गा संगवारी।
सरग बनाही संगी तोरेच घर दुवारी।।
सरग बनाही संगी तोरेच घर दुवारी।।