बिहना के सरसर हवा

बसेरा ले निकल जाय पहट बिहानिया सुरुज देव जिनगी म अंजोर बगराय                                                                मुंदराहा ले ... thumbnail 1 summary

बसेरा ले निकल जाय
पहट बिहानिया सुरुज देव
जिनगी म अंजोर बगराय
                                                               मुंदराहा ले कुकरा बासय
आमा रुख म कोयली कुकय
मउंरे आमा ममहाय
बिहना के सरसर सरसर हवा
सबो के मन ल भाय
चिरई चिरगुन तान छेड़य
गीत मया के गाय
कोयली के मीठ सुग्हर बोली
बिहना ले कुहकुहाय
बिहानिया कुन गाय गरुवा
कोठा कुरिया म नरियाय
अंगना दुवार ल खरेरा मारे
डोकरी दाई ह खिसियाय
एति तेति दउंड़त भागत
बछरुं पिला चिचयाय
दुध दुहे बर राउंत बिचारा
बिहना ले नंगत गरियाय
घर के आंट म डोकरा बबा
गोलाबिड़ी ल सुलगाय
फुकुर फुकुर पिए बबा
धुंगगिया ल उड़ाय
छानी उपर कउंवा बईठके
कांव कांव चिल्लाय
बिहना के सरसर सरसर हवा
सबो के मन ल भाय
ओनिहारी के पिंयर सरसो
लहर लहर लहलहाय
पहट बिहानिया सुरुज देव
जिनगी म अंजोर बगराय
बसंत बहार के महिना
परसा फुल ललियाय
सुग्हर लागे लाली परसा
डारा पाना हरियाय