पानी के सदुपयोग करो,
थोडकन न दुरूपयोग करो .
पानी ले सबके बुझते प्यास.
पानी हाबे अब कमती हमर पास,
सुख गे झरना अऊ तरिया,
खपत के बढगे दबाव,
जिहा रूकथे गन्दा पानी ऊंहा होथे मच्छार रानी,
जब तक न आ जाये सावन के बरखा,
पानी बचाये के करबो बात,
आपस मा सहमत होहू,
तभे होही गरमी पार,