मोला का हो गेहे जोहिं जिया आज फेर धधकत हे।

मोर मन के बियारा मा,तोर मया के  गांजे हौ खरही! सुरता के ढकना चाबत हे नींद परही की नई पर ही। मोला का हो गेहे जोहिं जिया आज फेर धधकत हे। कोन... thumbnail 1 summary


मोर मन के बियारा मा,तोर मया के  गांजे हौ खरही!
सुरता के ढकना चाबत हे नींद परही की नई परही।
मोला का हो गेहे जोहिं जिया आज फेर धधकत हे।
कोनो मोल के बता दव ये तन कब तलक बरही।